Thursday, January 29, 2009

मेरे गम





















तुम न हुए गम तो फीर
हम जीए साहारे किसके
मौतआए तो लौट जाना
घरी भर ठहरो तो सही -
साथ चले उम्रभर हमारे
तो थोड़ी देर और सही ।

भूल सकता नही उन्हें
हर बार जो दगा देते हैं
हैं अनजान वफ़ा से पर
इल्ज़ाम-ऐ-वफ़ा देते है
आकर् साथ मेरे उनसे तुम
मिलो तो सही -


हमे अनजाम-ऐ-मुहब्बत का इल्म
हो या न हो
दौलत-ऐ-इश्क का गुमां
हो या न हो
इल्तेजा इत्नी है, हकीक़त-ऐ-बयाँ
हो तो सही -



Jorhat, Assam
July 3, 2005

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शब्द, कुछ शब्द

शब्द, कुछ शब्द -
. जिन्हें जोड़के कहानिया बनी
. जिन्हें मोड़के रास्ते बनाये गए ...
. कुछ ऐसे ही शब्दों का दास्ताँ है ये ज़िन्दगी ll



शब्दों के हैं कोई बादशाह तो कोई गुलाम है
शब्द - कहीं अघाज़ तो कहीं अंजाम है
शब्दों से तुम तुम हो, हम हम हैं
शब्दों से कोई मशहूर तो कोई बदनाम हैं
शब्दों से लुटाये गए कुछ नगमे
शब्दों से बंधे गया कुछ रिश्ते
शब्दों से ही उभर आती है खुशी
शब्दों से छुपाये गए कुछ गम हैं!

शब्दों में मिलन का पय्गाम होता है
शब्दों में कुछ खास तो कुछ आम होता है
शब्दों से ही कोई बड़ा, कोई छोटा है
शब्द - कहीं रहीम तो कहीं राम होता है ...
शब्द जो जुड़े तो इतिहास रची
शब्दों से क्रांति और आन्दोलन मची
शब्दों से बनी है कितने ही कबितायें
शब्दों से ही हर कवि का एक अलग नाम होता है!


शब्द, कुछ शब्द -
. जिनहें जोडके कहानिया बनी ll



Jorhat, Assam
June 30, 2005

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